एहसास
कैसे मारा होगा तुमने उस बच्चे को कैसे जलाया होगा उस बूढ़ी को घर में क्या सच में राम नहीं याद आते तुमको क्या सच में दिल नहीं दहलता तुम्हारा। क्या चीखें नहीं सुनी तुमने सच में, क्या मिन्नतें भी नहीं पिघलाती तुम्हें, बद दुआ का भी डर नहीं लगा क्या तुमको जलती लाशों पे रोते बच्चो पे तरस नहीं आया? जब घर गए वापस ये दरिंदगी करके देखा अपना बच्चा,क्या वो बच्चा याद आया? जिसे छोड़ आए थे लाशों के बीच तुम क्या मां में तुम्हें उसकी मां ना दिखी , सच्ची बताना दिल भूल पाया क्या उसको जिसे जाने बिना ही बेजान कर आए तुम। कुछ तो किया होगा भूलाने की कोशिश में शायद शोर इसलिए ही किया होगा तुमने वो नारे जो तुमने लगाए, वो कोशिश थी तुम्हारी की भूल जाओ उन चीखों को तुम भी। सच्ची बताना क्या भूल पाओगे तुम कभी भी जो पूछेगा बेटा क्या करके आए हो पापा क्या बता पाओगे उसको जो किया कारनामा क्या बताओगे मां को की कैसे जलाया किसी की मां को सच्ची बताना मां जान ना जाए इसलिए क्या आखें चुराई थी? अल्लाह को नहीं जानती,पर राम को थोड़ा जाना है खुश नहीं होंगे वो यूं बहते खून देखकर। बहुत मानती हूं राम को,पर ...