Posts

Showing posts from February, 2020

एहसास

कैसे मारा होगा तुमने उस बच्चे को कैसे जलाया होगा उस बूढ़ी को घर में क्या सच में राम नहीं याद आते तुमको क्या सच में दिल नहीं दहलता तुम्हारा। क्या चीखें नहीं सुनी तुमने सच में, क्या मिन्नतें भी नहीं पिघलाती तुम्हें, बद दुआ का भी डर नहीं लगा क्या तुमको जलती लाशों पे रोते बच्चो पे तरस नहीं आया? जब घर गए वापस ये दरिंदगी करके देखा अपना बच्चा,क्या वो बच्चा याद आया? जिसे छोड़ आए थे लाशों के बीच तुम क्या मां में तुम्हें उसकी मां ना दिखी , सच्ची बताना दिल भूल पाया क्या उसको जिसे जाने बिना ही बेजान कर आए तुम। कुछ तो किया होगा भूलाने की कोशिश में शायद शोर इसलिए ही किया होगा तुमने वो नारे जो तुमने लगाए, वो कोशिश थी तुम्हारी की भूल जाओ उन चीखों को तुम भी। सच्ची बताना क्या भूल पाओगे तुम कभी भी जो पूछेगा बेटा क्या करके आए हो पापा क्या बता पाओगे उसको जो किया कारनामा क्या बताओगे मां को की कैसे जलाया किसी की मां को सच्ची बताना मां जान ना जाए इसलिए क्या आखें चुराई थी? अल्लाह को नहीं जानती,पर राम को थोड़ा जाना है खुश नहीं होंगे वो यूं बहते खून देखकर। बहुत मानती हूं राम को,पर ...

सफर

हां कुछ बातें है जो कहनी नहीं है, हां कुछ सच है जो बतानी नहीं है हां कुछ खो दिया सफर में जो अब जरूरी नहीं है हां कुछ जी लिया सफर में जो अब यादों में नहीं है हां कुछ पा लिया सफर में जो अब जिंदगी मेरी है। हर राह से यूं गुज़रा ये मेरा वक़्त है जब जहां से गुजरा एक लम्हा बना हर लम्हा जीना कहा सीखा कुछ गिर गए कुछ बिखर गए कुछ खो गए लम्हे जो सहेजे बस अमानत वो हो गए मंजिलों का पता बदलता रहा जिंदगी का करवां चलता रहा मुड़ के देखने से गिरने का डर तो है पर गिरकर ही मंजिले नजर आती है बेहतर। तो गिरते सम्हलते पता यूं बदलते चले जा रहे है अनजानी डगर पे की मिलेगा वो पता भी जिसे ढूंढ़ते है ना जाने हम कबसे वो पता पूछते है वो पता जो आखिरी पता होगा अपना वो पता जो मंजिल आखिरी होगा अपना।