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Showing posts from April, 2020

अपने

क्यों रोए तुम दुनिया का सोच कर ये दुनियां किसी की हुई कहां है जो अपने हैं वह सदा रहेंगे गैरों का हमें सोचना ही क्या है। जिसने ऊंगली एक उठाई तुमपे बाकी चार खुद उसके ओर उठी है तू अब भी सबसे बेहतर है, तो तन जा थोड़ा खुश हो जा थोड़ा जब तक खुश है तभी तक तू है तो, हंस क्योंकि हंसी प्यारी है तुम्हारी हंस तू क्योंकि तुझे हंसना ही है हंस क्योंकि हंसी ताकत है तेरी हंस क्योंकि तुझे रोना नहीं है। सोच कितनो को प्रेरित किया है, कितनो को उम्मीद है तुमसे हंस उनके लिए जो मानते है तुमको मत रो उनके लिए जो नहीं जानते है तुमको सब नकाबपोश है इसलिए अच्छे है, सबकी नजर से खुद को मत आंकना तुमसे बेहतर तुमको कोई नहीं जानता तो,जी खुद के लिए ,हंस खुद के लिए तो हंस क्योंकि हंसी प्यारी है तेरी तो हंस क्योंकि तुम्हें  हंसना ही है।

अपराध

जिनके लिए ढाल बने, जिनके लिए सख्त दीवार बने जिनके लिए जहां में बदनाम हुए आज उनके ही लिए शर्मसार हुए। थोड़ी लाज तो रख लेते, मेरी नहीं अपना ही ख्याल रख लेते नज़रें मेरी नीची तो हो गई आज पर नीची नजर में मेरी तुम भी तो नीचे हो गए । माफ तो तुमको कर ही देंगे, खुद को माफ ना कर सकेंगे, रिश्ते बचाना हमें आता है, थोड़ी लाज तुम भी बचा लेते।

तड़प

सुनसान सी दोपहर और खाली सड़कें, खाली सड़कें और खाली दूरे दरवाज़ें दरवाजों से आती पहचानी सी आवाजें आवाजें या एक हंसी है शायद तरस खाती और खुद पे इतराती सुनसान तुम भी सुनसान हम भी तरसते तुम भी तरसते हम भी पर फर्क तो फिर भी है हम तुम में खुद को खोजते इन गलियों में आते हो हम को तो तुम यूं ही मिल जाते हो सुनसान होकर भी हम आदत है तुम्हारी हमारी गलियां तुम बिन भी आबाद है ।