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Showing posts from July, 2020

माचिस

एक तीली जैसे माचिस की रगों में सभी के बहती है, एक गर्म हवा ही काफी है तीली को आग बनाने को, ये गर्म हवा तुम तक भी आती होगी, तीली की लौ अक्सर ही जलती होगी, एक तीली घर भी जलाती है और, तीली से दिया भी जलता है। तुम सोंच लो क्या जलाना है, घर जले तो रिश्ते जलते हैं, रिश्ते जले तो कुछ हम भी मरते है, जो दीप जले तो दीवाली आती है। तीली का काम जलाना है, जलना तो हमको है हरदम, जले ऐसे कि जगमग कर दे, जो बुझे तो बस एक शून्य सा कर दे।

अनोखे रिश्ते

कुछ रिश्तों की गहराई का एहसास होता तब है , जब उसके टूटने के आसार नजर आते है। ये कुछ पोशीदा पर यकीनी रिश्ते, वो रिश्ते जो लगा, कमजोर पड़ गए सफर में, उसके टूटने के डर से सिहर सी गई क्यूं, इस डर को लिए जब खुद को देखा तो पूछा खुद से, सांसे भी कभी जान लिए बगैर जाती है क्या? ये रिश्ते सांसों की तरह मुझमें मौजूद है, जान के रहते ये जाएगी कैसे? यूं लगा परछाई बनकर ये रिश्ते साथ चल रहे थे, धूप और छांव के जैसे आस पास पल रहे थे। फ़िक्र थी जिस रिश्ते को बचाने की हमे, वो रगों में कबका बस चुका था मेरे, हमे गुमान था कि हम बचा रहे जिसको, वो रिश्ता हमे सम्हालता रहा उम्र भर।