बेटी
मेरी बेटी तुम मेरी बिलकुल मत सुनना, तुम जोड़ से हंसना दिल खोल के जीना, तुम गलती करने से मत डरना, हर गलती से तुम कुछ सीख भी लेना । हर हाल में हूं मै साथ तुम्हारे , तुम ना को भी मेरी हां ही समझना। मैं कहूंगी तुमसे यूं मत चलना, कहूंगी ये कपड़े ना पहनना कहूंगी तुम ऐसे मत जीना , मेरी बेटी तुम मेरी बिल्कुल मत सुनना । दुनियां की मैं सब सुन लुंगी , तुम बस अपने आप की सुनना दिल और दिमाग को भिड़ने देना बस खुद से खुद को लड़ने देना, अपने आप से जो तुम सच बोलोगी हर हाल में जीत तुम्हारी होगी । अपना कल तुमको ही है जीना पर कल की चिंता आज ना करना, आज का दिन फिर ना आएगा हर दिन को तुम ये सोच के जीना । कल शायद मैं हर बात पर रोकूं हर बात में दुनिया सी ताने मारू, शायद मै तुमको समझ ना पाऊं, बस तुम मुझसे नाराज़ ना होना मेरी बेटी तुम मेरी बिलकुल मत सुनना।