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Showing posts from August, 2020

जाहिल

तुम हो कौन बे मुझे बताने वाले कि मेरी औकात क्या है, तुम हो कौन बे मुझे बताने वाले कि मेरी पहचान क्या है, ये मेरी जमीन मेरा आसमान तुमसे नही है बे तुम मेरी वजुद का बस एक बहुत मामुली सा हिस्सा हो हमने थोडी सी इज्जत क्या दे दी तो मुझसे ही सवाल पूछते हो, ये हक, ये होसला भी हमने ही दिया है तुमको, कि तुम खुश रहो, पर हमारी खुशी पर जो बात आयी तो ये जान लो तुम, ना ये जमीन ना ये आसमन रहेगी तेरे सिर पर, फिरते रहोगे दर बदर बस अपना वजुद खोजते तुम, हम पर जो एहसान जताते हो पल पल, तो थोड़ा तो तरस आता है हमको तुम पर बस इतना ही एहसान कर पाए मुझ पर? तेरे एहसान खाली बर्तन की तरह ही, तर रहे है पानी के ऊपर ही ऊपर , ये दिखते बहुत है मगर है खाली खाली, जरा थोड़ी डूबकी लगा कर तो देखो, मेरे एहसान की बोड़ी नीचे पड़ी है जो दिखती नहीं पर तुझ सी खाली नहीं है। तुझे अपना माना सो, देते ही गए हम, पर जो आज तुमने जता ही दिया कि, तुम बस एक मर्द हो वो भी बड़े जाहिल, बस इंसान बन जाओ तो वह भी हो काफी।

लड़ना झगड़ना

दिल है आज झगड़ने का, एक नहीं सबसे लड़ने का, परेशान हूं मै अपने दिल से, रोज की इसकी चिकचिक से दिल की सुन ने का दिल है आज पर कौन है जिस से लड़ू मै आज कोई पास तो हो इतना अपने, जो पास है उनसे ही कितना लड़ू। लड़ना ऐसे कि सब जमा निकल जाए कुछ यादें कुछ बात निकल आए, सब बुरा सब खराब निकल जाए, फिर से सब तरोताजा हो जाए।