पंक्षी
तू उड़ना मेरी जान, तुम बस उड़ना,
उड़ना तू खुले आसमान में बेधड़क,
पर पतंग नही ,पंछी बनकर उड़ना,
देखा है हमने आसमान की गहराई को दूर से,
तुम पास जाना और जी लेना उसको,
मेरी ना को तुम मेरा डर समझना,
डर , तुम्हे पतंग ना बना पाने का,
पर तुम पतंग नही ,पंछी बनकर उड़ना,
तुम अपनी आंखे खुली रखना ,और सीख लेना
सीख लेना हर पल से, हर हार से,हर जीत से,
तुम सीख लेना उड़ना और जीतना हर डर से,
पर पतंग नही ,पंछी बनकर ही उड़ना मेरी चिड़ियां,
डरते है हम आसमान से और उसके सन्नाटे से,
डरते है गिरने से,पर तुम मत डरना किसी से भी,
तुम उड़ना,गिरना, फिर उठना और फिर उड़ना,
बस तुम रुकना नही मेरी बेटी, बस उड़ना,
पर पतंग नही ,पंछी बनकर उड़ना मेरी बच्ची,
तुम समझ लेना पतंग और पंछी के अंतर को,
उड़ते दोनो है, पर फर्क है,
जिंदगी नाम है सीखने का,
तो सीखना हर गलती, हर नाकामी से , पर सीखना,
क्योंकि हारता बस वो है जो सीखता नही।
कोशिश मेरी भी रहेगी तुम्हे पतंग बनाने की,
तुम्हारी डोर को हाथ से न छोड़ने की,
पर तुम समझ लेना मेरे डर को,
डर, तुम्हारी रक्षा और भविष्य का,
डर,तुम्हे दुनिया के सांचे में ना ढाल पाने का,
पर पतंग नही ,पंछी बनकर उड़ना मेरी बेटी।
मैं खुश हूं अगर तुम खुश हो,
तो खुश रहना दिल से,हमेशा
मेरे लिए नही, किसी और के लिए नही,
बस अपने लिए,तुम बहुत खुश रहना
पर पतंग नही ,पंछी बनकर उड़ना मेरी जान।
बस याद ये रहे हमेशा मेरा बच्चा,
एक आम सी मां की खास सी बेटी हो,
तो तुम उड़ना,तुम खुश रहना,
और भरोसा रखना,मैं हूं साथ हर हाल में तुम्हारे,
तो तुम उड़ना,पर पतंग नही पंछी बनकर ।
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