तुम
तुम हो पास ये एहसाह ही काफी है,
मेरे लिए तेरी आवाज़ ही काफी है,
मेरे लिए तेरी आवाज़ ही काफी है,
जी लेती हूं अकेले भी मैं , पर फिर
अकेलेपन में भी तेरा एहसास लाज़िम है।
मेरी लिए कितने जरूरी हो, इस बात से अनजान हो
पर , जान जाओगे गर नजर नहीं रूह से काम लोगे,
एहसास छल नही करते गर ईमानदार हो तुम,
तुम एहसास में हो तो अकेली नहीं हूं मै,
बस तुम्हारे साथ का एहसास ही काफी है ।
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