मनाना
इंतजार था की आओगे , मनाओगे
कहोगे अब बस भी करो,
और मैं बस मान जाती ।
बस इतना ही फासला है,
इतनी सी ही बात है।
पर ये फासले बस बढ़ ही रहे,
ना तुमने मनाया और ना हम माने।
आसान तो तुम्हे मनाना भी ना था,
कभी माने कभी ना माने तुम,
पर मैं आई तुम्हे मानने हर हाल में।
हां माना मान जाना आसान नहीं हर किसी के लिए
पर प्यार हो तो झुक जाना इतना भी मुश्किल नही है,
देख लो,गर बचा है प्यार तो मान जाओ,
थोड़ा तुम , थोड़ा हम भी झुक जाए,
गर प्यार नही है , तो बस रहने ही दो,
यूं ही चलेंगे साथ साथ तनकर और
टूट जायेंगे एकदिन लकड़ी बनकर।
Comments
Post a Comment