शर्त
प्यार की शर्त क्या हो,
या फिर प्यार की कोई शर्त ना हो?
पर मैंने शर्त रखी है , बस
प्यार की शर्त ये कि बस प्यार हो,
चाहे जितनी नाराजगी हो
पर आंसू पोछने आए वो
गर मेरे दुख से दुखी नहीं वो
तो ऐसा प्यार का क्या मतलब?
नाराजगी और प्यार साथ चलते है,
सुना है मैने, फिर
नाराजगी इतनी बड़ी ,
कि प्यार पे भारी पर जाए?
इतना कमजोर प्यार , फिर प्यार ही क्या
प्यार में जान ना दो पर साथ तो दो?
और यदि सुख दुख का साथ ही नही ,
तो ये प्यार ही नही फिर ।
ऐसी भी क्या नाराजगी कि, प्यार मर भी जाए
फिर भी ये नाराजगी रह जाए?
प्यार पर जब अहम भारी ,तो ये
प्यार सांस कैसे ले फिर?
ऐसा प्यार तो फिर बस मर गया है,
इसे कंधा दो ,घाट तक पहुचाओ ।
तुम प्यार मत करो बस रिश्ते निभाओ
बस इसको प्यार का नाम ना दो।
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