रिश्ते
कुछ टूट रहा है अंदर जाने
आवाज़ नहीं आयी है पर
टूटा जो वो ना जुड़ पाएगा
कुछ दर्द वहीं रह जाएगा
जो तीर निकला है तरकश से
उसको रोक कौन पाएगा
अभी तो बस खामोशी है
पर अंदर इक तूफान उठा है
जब ये खामोशी टूटेगी तो
सैलाब आएगा ये दर्द तभी जाएगा
जो बह जाए दर्द तो अच्छा है
पर साथ ये रिश्ते ना बह जाए
बचा ले जो रिश्ता तभी बात बनती है
वरना टूटे रिश्ते की कसक सदा रहती है।
आवाज़ नहीं आयी है पर
टूटा जो वो ना जुड़ पाएगा
कुछ दर्द वहीं रह जाएगा
जो तीर निकला है तरकश से
उसको रोक कौन पाएगा
अभी तो बस खामोशी है
पर अंदर इक तूफान उठा है
जब ये खामोशी टूटेगी तो
सैलाब आएगा ये दर्द तभी जाएगा
जो बह जाए दर्द तो अच्छा है
पर साथ ये रिश्ते ना बह जाए
बचा ले जो रिश्ता तभी बात बनती है
वरना टूटे रिश्ते की कसक सदा रहती है।
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