सच-झूठ

यह हंसी जो तुमने ओढ़ी है,
हंसी तुम्हारी हंसी सी नहीं,
ये बातें जों तुमने बोली है,
बातें तुम्हारी लगती ही नहीं ।

ये बस क्या मेरा ही भ्रम है,
या सच में तुम छुप गए कहीं,
जो दिख रहा है वह तुम नहीं,
ये तो तुम्हारी परछाई भी नहीं ।

ना चाहो तो ना बताओ,
पर बात अब यह छुपी नहीं,
यह झूठ जो तुमने ओढ़ी है,
यह झूठ बहुत ही सच्ची है ।

तुम कह दो मेरा भ्रम है ये,
तुम कह दो आंखो का धोखा है,
मै मान भी लू जो तुम कह दो, 
तुम पर बहुत भरोसा है ।

पर आंखे जो तेरी कहती है,
वह बात बहुत ही सच्ची है,
यह हंसी जो तुमने ओढ़ी है
वह झूठ बहुत ही सच्ची है ।


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