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पंक्षी

तू उड़ना मेरी जान, तुम बस उड़ना, उड़ना तू खुले आसमान में बेधड़क, पर पतंग नही ,पंछी बनकर उड़ना, देखा है हमने आसमान की गहराई को दूर से, तुम पास जाना और जी लेना उसको, मेरी ना को तुम मेरा डर समझना, डर , तुम्हे पतंग ना बना पाने का, पर तुम पतंग नही ,पंछी बनकर उड़ना, तुम अपनी आंखे खुली रखना ,और सीख लेना सीख लेना हर पल से, हर हार से,हर जीत से, तुम सीख लेना उड़ना और जीतना हर डर से, पर पतंग नही ,पंछी बनकर ही उड़ना मेरी चिड़ियां, डरते है हम आसमान से और उसके सन्नाटे से, डरते है गिरने से,पर तुम मत डरना किसी से भी, तुम उड़ना,गिरना, फिर उठना और फिर उड़ना, बस तुम रुकना नही मेरी बेटी, बस उड़ना, पर पतंग नही ,पंछी बनकर उड़ना मेरी बच्ची, तुम समझ लेना पतंग और पंछी के अंतर को, उड़ते दोनो है, पर फर्क है, जिंदगी नाम है सीखने का, तो सीखना हर गलती, हर नाकामी से , पर सीखना, क्योंकि हारता बस वो है जो सीखता नही। कोशिश मेरी भी रहेगी तुम्हे पतंग बनाने की, तुम्हारी डोर को हाथ से न छोड़ने की, पर तुम समझ लेना मेरे डर को, डर, तुम्हारी रक्षा और भविष्य का, डर,तुम्हे दुनिया के सांचे में ना ढाल पाने का, पर पतंग नही ,पंछी बन...

शर्त

प्यार की शर्त क्या हो, या फिर प्यार की कोई शर्त ना हो? पर मैंने शर्त रखी है , बस प्यार की शर्त ये कि बस प्यार हो, चाहे जितनी नाराजगी हो पर आंसू पोछने आए वो गर मेरे दुख से दुखी नहीं वो तो ऐसा प्यार का क्या मतलब? नाराजगी और प्यार साथ चलते है, सुना है मैने, फिर  नाराजगी इतनी बड़ी  , कि प्यार पे भारी पर जाए? इतना कमजोर प्यार , फिर प्यार ही क्या प्यार में जान ना दो पर साथ तो दो? और यदि सुख दुख का साथ ही नही , तो ये प्यार ही नही फिर । ऐसी भी क्या नाराजगी कि, प्यार मर भी जाए फिर भी ये नाराजगी रह जाए? प्यार पर जब अहम भारी ,तो ये प्यार सांस कैसे ले फिर? ऐसा प्यार तो फिर बस मर गया है, इसे कंधा दो ,घाट तक पहुचाओ । तुम प्यार मत करो बस रिश्ते निभाओ बस इसको प्यार का नाम ना दो।

तुम

तुम हो पास ये एहसाह ही काफी है, मेरे लिए तेरी आवाज़ ही काफी है, जी लेती हूं अकेले भी मैं , पर फिर अकेलेपन में भी तेरा एहसास लाज़िम है। मेरी लिए कितने जरूरी हो, इस बात से अनजान हो पर , जान जाओगे गर नजर नहीं रूह से काम लोगे, एहसास छल नही करते गर ईमानदार हो तुम, तुम एहसास में हो तो अकेली नहीं हूं मै, बस तुम्हारे साथ का एहसास ही काफी है ।

मनाना

 इंतजार था की आओगे , मनाओगे  कहोगे अब बस भी करो,   और मैं बस मान जाती । बस इतना ही फासला है, इतनी सी ही बात है। पर ये फासले बस बढ़ ही रहे, ना तुमने मनाया और ना हम माने। आसान तो तुम्हे मनाना भी ना था, कभी माने कभी ना माने तुम, पर मैं आई तुम्हे मानने हर हाल में। हां माना मान जाना आसान नहीं हर किसी के लिए पर प्यार हो तो झुक जाना इतना भी मुश्किल नही है, देख लो,गर बचा है प्यार तो मान जाओ, थोड़ा तुम , थोड़ा हम भी झुक जाए, गर प्यार नही है , तो बस रहने ही दो, यूं ही चलेंगे साथ साथ तनकर और  टूट जायेंगे एकदिन लकड़ी बनकर।

बेटी

 मेरी बेटी तुम मेरी बिलकुल मत सुनना, तुम जोड़ से हंसना दिल खोल के जीना, तुम गलती करने से मत डरना, हर गलती से तुम कुछ सीख भी लेना । हर हाल में हूं मै साथ तुम्हारे , तुम ना को भी मेरी हां ही समझना। मैं कहूंगी तुमसे यूं मत चलना, कहूंगी ये कपड़े ना पहनना  कहूंगी  तुम ऐसे मत जीना , मेरी बेटी तुम मेरी बिल्कुल मत सुनना । दुनियां की मैं सब सुन लुंगी , तुम बस अपने आप की सुनना  दिल और दिमाग को भिड़ने देना  बस खुद से खुद को लड़ने देना, अपने आप से जो तुम सच बोलोगी हर हाल में जीत तुम्हारी होगी । अपना कल तुमको ही है जीना  पर कल की चिंता आज ना करना, आज का दिन फिर ना आएगा  हर दिन को तुम ये सोच के जीना । कल शायद मैं हर बात पर रोकूं  हर बात में दुनिया सी ताने मारू, शायद मै तुमको समझ ना पाऊं, बस तुम मुझसे नाराज़ ना होना  मेरी बेटी तुम मेरी बिलकुल मत सुनना।

जाहिल

तुम हो कौन बे मुझे बताने वाले कि मेरी औकात क्या है, तुम हो कौन बे मुझे बताने वाले कि मेरी पहचान क्या है, ये मेरी जमीन मेरा आसमान तुमसे नही है बे तुम मेरी वजुद का बस एक बहुत मामुली सा हिस्सा हो हमने थोडी सी इज्जत क्या दे दी तो मुझसे ही सवाल पूछते हो, ये हक, ये होसला भी हमने ही दिया है तुमको, कि तुम खुश रहो, पर हमारी खुशी पर जो बात आयी तो ये जान लो तुम, ना ये जमीन ना ये आसमन रहेगी तेरे सिर पर, फिरते रहोगे दर बदर बस अपना वजुद खोजते तुम, हम पर जो एहसान जताते हो पल पल, तो थोड़ा तो तरस आता है हमको तुम पर बस इतना ही एहसान कर पाए मुझ पर? तेरे एहसान खाली बर्तन की तरह ही, तर रहे है पानी के ऊपर ही ऊपर , ये दिखते बहुत है मगर है खाली खाली, जरा थोड़ी डूबकी लगा कर तो देखो, मेरे एहसान की बोड़ी नीचे पड़ी है जो दिखती नहीं पर तुझ सी खाली नहीं है। तुझे अपना माना सो, देते ही गए हम, पर जो आज तुमने जता ही दिया कि, तुम बस एक मर्द हो वो भी बड़े जाहिल, बस इंसान बन जाओ तो वह भी हो काफी।

लड़ना झगड़ना

दिल है आज झगड़ने का, एक नहीं सबसे लड़ने का, परेशान हूं मै अपने दिल से, रोज की इसकी चिकचिक से दिल की सुन ने का दिल है आज पर कौन है जिस से लड़ू मै आज कोई पास तो हो इतना अपने, जो पास है उनसे ही कितना लड़ू। लड़ना ऐसे कि सब जमा निकल जाए कुछ यादें कुछ बात निकल आए, सब बुरा सब खराब निकल जाए, फिर से सब तरोताजा हो जाए।

माचिस

एक तीली जैसे माचिस की रगों में सभी के बहती है, एक गर्म हवा ही काफी है तीली को आग बनाने को, ये गर्म हवा तुम तक भी आती होगी, तीली की लौ अक्सर ही जलती होगी, एक तीली घर भी जलाती है और, तीली से दिया भी जलता है। तुम सोंच लो क्या जलाना है, घर जले तो रिश्ते जलते हैं, रिश्ते जले तो कुछ हम भी मरते है, जो दीप जले तो दीवाली आती है। तीली का काम जलाना है, जलना तो हमको है हरदम, जले ऐसे कि जगमग कर दे, जो बुझे तो बस एक शून्य सा कर दे।

अनोखे रिश्ते

कुछ रिश्तों की गहराई का एहसास होता तब है , जब उसके टूटने के आसार नजर आते है। ये कुछ पोशीदा पर यकीनी रिश्ते, वो रिश्ते जो लगा, कमजोर पड़ गए सफर में, उसके टूटने के डर से सिहर सी गई क्यूं, इस डर को लिए जब खुद को देखा तो पूछा खुद से, सांसे भी कभी जान लिए बगैर जाती है क्या? ये रिश्ते सांसों की तरह मुझमें मौजूद है, जान के रहते ये जाएगी कैसे? यूं लगा परछाई बनकर ये रिश्ते साथ चल रहे थे, धूप और छांव के जैसे आस पास पल रहे थे। फ़िक्र थी जिस रिश्ते को बचाने की हमे, वो रगों में कबका बस चुका था मेरे, हमे गुमान था कि हम बचा रहे जिसको, वो रिश्ता हमे सम्हालता रहा उम्र भर।

अल्सायी सी मै

अल्सायी सी दिन और अल्सायी यें रात कुछ मौसम अल्साया सा कुछ अल्सायी मै, कुछ सोए और कुछ जागे ये फुरसत के पल, जिए इस पल को कुछ ऐसे की पता ना चले  कि सोए है या जागे,या बस कल्पना है, पता हो बस इतना कि आज अलसाई सी मै हूं। अल्साए इस पल में,धुंधली यादों का यूं आना, वो यादों का आना और आ कर जम यूं जाना, लगा यूं की मिट्टी पे पड़े अल्साये पत्तों पर जैसे, सावन कि फुहारों का मचल कर आ जाना । ये आलास के पल इतने बदनाम जाने क्यूं है, अलास का मजा एक आलसी से पूछो, जो मिल जाए आलस और यादें पुरानी, तो ये मजा सावन के बारिश में भी कहा है । हां रुलाती भी है ये आलस और यादें, पर सावन बिना पानी के भाती भी कहां है, फिर यादों में भीगने का मजा ही अलग, यूं अल्साई लम्हों की खुशबू ही अलग है।

ख़ास

तुम ख़ास हो ये बताना है  पता होगा तुम्हे, जताया तो बहुत है, ये बात तो तुमसे भी छुपी नहीं तुम हो तो कितना खास है सब, जब भी तुमने हिचकी ली तुम मान लो मैंने याद किया जब भी तुमने मुझे याद किया तुम मान लो तेरे पास ही हूं। कहते है दिल का रिश्ता दिल का दिल से ही होता है तुम दूर सही पर मुझसे पूछो हर वक़्त मेरे ही साथ हो तुम । तुमसे कहना तो बहुत कुछ है पर कहकर कहना क्या कहना है तुम जान लो खुद तो कुछ बात हुई हर बात कही नहीं जाती है । कुछ डर सी गई हूं जाने क्यों, कुछ दिल को ऐसा लगा है क्यों तुम खुश रहो तो मै खुश हूं पर तुम चुप हो तो कुछ चुभता है । चेहरे पे हंसी से ज्यादा तुम दिल से खुश सदा रहना  दिल से दिल जुड़ा है अपना हंसी भी दिल तक पहुंचेगी ।

सच-झूठ

यह हंसी जो तुमने ओढ़ी है, हंसी तुम्हारी हंसी सी नहीं, ये बातें जों तुमने बोली है, बातें तुम्हारी लगती ही नहीं । ये बस क्या मेरा ही भ्रम है, या सच में तुम छुप गए कहीं, जो दिख रहा है वह तुम नहीं, ये तो तुम्हारी परछाई भी नहीं । ना चाहो तो ना बताओ, पर बात अब यह छुपी नहीं, यह झूठ जो तुमने ओढ़ी है, यह झूठ बहुत ही सच्ची है । तुम कह दो मेरा भ्रम है ये, तुम कह दो आंखो का धोखा है, मै मान भी लू जो तुम कह दो,  तुम पर बहुत भरोसा है । पर आंखे जो तेरी कहती है, वह बात बहुत ही सच्ची है, यह हंसी जो तुमने ओढ़ी है वह झूठ बहुत ही सच्ची है ।

अपने

क्यों रोए तुम दुनिया का सोच कर ये दुनियां किसी की हुई कहां है जो अपने हैं वह सदा रहेंगे गैरों का हमें सोचना ही क्या है। जिसने ऊंगली एक उठाई तुमपे बाकी चार खुद उसके ओर उठी है तू अब भी सबसे बेहतर है, तो तन जा थोड़ा खुश हो जा थोड़ा जब तक खुश है तभी तक तू है तो, हंस क्योंकि हंसी प्यारी है तुम्हारी हंस तू क्योंकि तुझे हंसना ही है हंस क्योंकि हंसी ताकत है तेरी हंस क्योंकि तुझे रोना नहीं है। सोच कितनो को प्रेरित किया है, कितनो को उम्मीद है तुमसे हंस उनके लिए जो मानते है तुमको मत रो उनके लिए जो नहीं जानते है तुमको सब नकाबपोश है इसलिए अच्छे है, सबकी नजर से खुद को मत आंकना तुमसे बेहतर तुमको कोई नहीं जानता तो,जी खुद के लिए ,हंस खुद के लिए तो हंस क्योंकि हंसी प्यारी है तेरी तो हंस क्योंकि तुम्हें  हंसना ही है।

अपराध

जिनके लिए ढाल बने, जिनके लिए सख्त दीवार बने जिनके लिए जहां में बदनाम हुए आज उनके ही लिए शर्मसार हुए। थोड़ी लाज तो रख लेते, मेरी नहीं अपना ही ख्याल रख लेते नज़रें मेरी नीची तो हो गई आज पर नीची नजर में मेरी तुम भी तो नीचे हो गए । माफ तो तुमको कर ही देंगे, खुद को माफ ना कर सकेंगे, रिश्ते बचाना हमें आता है, थोड़ी लाज तुम भी बचा लेते।

तड़प

सुनसान सी दोपहर और खाली सड़कें, खाली सड़कें और खाली दूरे दरवाज़ें दरवाजों से आती पहचानी सी आवाजें आवाजें या एक हंसी है शायद तरस खाती और खुद पे इतराती सुनसान तुम भी सुनसान हम भी तरसते तुम भी तरसते हम भी पर फर्क तो फिर भी है हम तुम में खुद को खोजते इन गलियों में आते हो हम को तो तुम यूं ही मिल जाते हो सुनसान होकर भी हम आदत है तुम्हारी हमारी गलियां तुम बिन भी आबाद है ।

रिश्ते

कुछ टूट रहा है अंदर जाने आवाज़ नहीं आयी है पर टूटा जो वो ना जुड़ पाएगा कुछ दर्द वहीं रह जाएगा जो तीर निकला है तरकश से उसको रोक कौन पाएगा अभी तो बस खामोशी है पर अंदर इक तूफान उठा है जब ये खामोशी टूटेगी तो सैलाब आएगा ये दर्द तभी जाएगा जो बह जाए दर्द तो अच्छा है पर साथ ये रिश्ते ना बह जाए बचा ले जो रिश्ता तभी बात बनती है वरना टूटे रिश्ते की कसक सदा रहती है।

एहसास

कैसे मारा होगा तुमने उस बच्चे को कैसे जलाया होगा उस बूढ़ी को घर में क्या सच में राम नहीं याद आते तुमको क्या सच में दिल नहीं दहलता तुम्हारा। क्या चीखें नहीं सुनी तुमने सच में, क्या मिन्नतें भी नहीं पिघलाती तुम्हें, बद दुआ का भी डर नहीं लगा क्या तुमको जलती लाशों पे रोते बच्चो पे तरस नहीं आया? जब घर गए वापस ये दरिंदगी करके देखा अपना बच्चा,क्या वो बच्चा याद आया? जिसे छोड़ आए थे लाशों के बीच तुम क्या मां में तुम्हें उसकी मां ना दिखी , सच्ची बताना दिल भूल पाया क्या उसको जिसे जाने बिना ही बेजान कर आए तुम। कुछ तो किया होगा भूलाने की कोशिश में शायद शोर इसलिए ही किया होगा तुमने वो नारे जो तुमने लगाए, वो कोशिश थी तुम्हारी की भूल जाओ उन चीखों को तुम भी। सच्ची बताना क्या भूल पाओगे तुम कभी भी जो पूछेगा बेटा क्या करके आए हो पापा क्या बता पाओगे उसको जो किया कारनामा क्या बताओगे मां को की कैसे जलाया किसी की मां को सच्ची बताना मां जान ना जाए इसलिए क्या आखें चुराई थी? अल्लाह को नहीं जानती,पर राम को थोड़ा जाना है खुश नहीं होंगे वो यूं बहते खून देखकर। बहुत मानती हूं राम को,पर ...

सफर

हां कुछ बातें है जो कहनी नहीं है, हां कुछ सच है जो बतानी नहीं है हां कुछ खो दिया सफर में जो अब जरूरी नहीं है हां कुछ जी लिया सफर में जो अब यादों में नहीं है हां कुछ पा लिया सफर में जो अब जिंदगी मेरी है। हर राह से यूं गुज़रा ये मेरा वक़्त है जब जहां से गुजरा एक लम्हा बना हर लम्हा जीना कहा सीखा कुछ गिर गए कुछ बिखर गए कुछ खो गए लम्हे जो सहेजे बस अमानत वो हो गए मंजिलों का पता बदलता रहा जिंदगी का करवां चलता रहा मुड़ के देखने से गिरने का डर तो है पर गिरकर ही मंजिले नजर आती है बेहतर। तो गिरते सम्हलते पता यूं बदलते चले जा रहे है अनजानी डगर पे की मिलेगा वो पता भी जिसे ढूंढ़ते है ना जाने हम कबसे वो पता पूछते है वो पता जो आखिरी पता होगा अपना वो पता जो मंजिल आखिरी होगा अपना।

DAAG

ज़िन्दगी यूँ भी चल रही थी ,हमारी ,दाग जरुरी था क्या सब रब की मर्जी है तो ,तुम्हारा होना भी जरुरी था क्या न होते गर तुम उस राह पर, जिस राह पे हम चल रहे थे फिर किसी और अनजाने राह पे यूँ ही हम मिलते क्या न मिलते गर किसी भी मोड़ पर तो क्या बदल जाता हम हम ही होते तुम तुम ही होते बस ये दाग ना होता 

मीठी

पौष के महीने मे वो , आयी घर मे फ़ागुन सी , नन्ही सी नखरीली सी ,कोमल नाजुक वो फूलों  सी , नाम से तो वो मीठी थी ,पर थी वो थोड़ी तीखी सी, नाक थी उसकी छोटी सी,जैसे वो गुस्से मे आयी हो, हँसी थी उसकी प्यारी सी,आँगन मे खुशबू लाई थी, नाम से तो वो मीठी थी ,पर थी वो थोड़ी तीखी सी, नन्ही सी मीठी जाने कब हो गयी बड़ी सी है वैसे तो हूँ मासी उसकी ,जाने क्यों लगती सखी सी है , समझाती हमें  बातें बड़ी ,लगती बड़ी सायानी सी  , नाम से अब भी मीठी है , है अब भी थोड़ी तीखी सी, खुले गगन मे राज करे ,उड़ान भरे वह पँछी सी, हर हार को जीत दिला दे वो ,चमक रहे आफ़ताब सी, मीठी रहे या तीखी रहे वो, सदा रहे उन्मुक्त  सी प्यार है उसको सखियों से ,तो सखी मैं उसकी बन जाऊ, गर शौक है उसको खेल का ,तो खेल मैं उसका बन जाऊ, घर दूर दूर है बहुत हमारे ,पर दिल आस पास ही मडराये, प्यार से सबने मीठी पुकारा ,वो आज भी देखो मीठी है, नाम से तो वो मीठी थी ,पर है अब भी थोड़ी तीखी सी,